● गोदान में आये मुख्य गाँव व उनसे जुड़े मुख्य पात्र :-
सेमरी - रायसाहब और अमरपाल सिंह
बेलारी - होरी
● पात्र योजना:-
1. कामता - बड़ा बेटा
2. जंगी - छोटा बेटा (भोला के बेटे)
3. सोभा - छोटा भाई
4. हीरा - बड़ा भाई (होरी के भाई)
5. पुन्नी - हीरा की पत्नी
6. गोविंदी - मिस्टर खन्ना की पत्नी
7. मिस्टर खन्ना - बैंक मैनेजर
8. मि. तन्खा - वकील , बीमा दलाल
9. ओंकारनाथ - बिजली पत्रिका के सम्पादक
10. पं. गोसेराम - कारकुन साहब
11. झिंगुरीसिंह - नोहरी से दूसरा विवाह करने वाले
12. सुंदरिया - गाय का नाम
13. मटरू - गाय के कल्पित बछड़े का नाम
14. गण्डासिंह - दरोगा
15. पंडित नोखेराम
16. मालती, सरोज और वरदा, मीनाक्षी - राय साहब की बेटियाँ
17. भीष्म - गोविंदी और खन्ना का बेटा
18. लल्लू - झुनिया का पहला बेटा
19. दोहरी - झुनिया का प्रसव कराने वाली महिला
20. मथुरा - सोना का पति
21. रुद्रपाल सिंह - सरोज का पति, मालती की बहन
22. मीनाक्षी - दिग्विजय की पत्नी
23. मंगल - झुनिया का दूसरा बेटा
24. रामू- सिलिया का बेटा
25. नोहरी - भोला की दूसरी पत्नी
26. सिलिया चमारिन
26. पं. दातादीन
27 मातादीन - दातादीन का बेटा और सिलिया का पति
● गोदान : प्रमुख कथन
1. " जिस घर में पेट भर रोटियाँ भी न मिले उसकी इतनी खुशामद क्यों? "...। (धनिया)
2. " जो मालिक प्रजा को न पालें , वह कोई आदमी है? " (होरी)
3. " अपना धर्म यह नहीं है कि मित्रो का गला दबायें"..। (होरी- भोला से गाय लेने से इनकार करने पर)
4. " यह तुम रोज रोज मालिको की खुशामद करने क्यूँ जाते हो?"...। (गोबर- होरी को कहता है)
5. " हमारा जन्म तो इसलिए हुआ है कि अपना रक्त बहाएं और दूसरों का घर भरे "...। (रामलीला के दौरान पैसे देने की चिंता-होरी)
6. " औरत को सबकुछ दे पर रूप न दे"...। (चौधरी- होरी से - जो बांस काटने आया होता है)
7. " नारी का धर्म है कि गम खाए"..। (दातादीन - धनिया से)
8. " मुझे उन लोगों से कोई दिलचस्पी नही जो बातें तो कम्युनिस्ट सी करते हैं परंतु रहते हैं एकदम रईस की तरह"...। (मेहता)
9. " मैं इसे स्वीकार करता हूँ की किसी को भी किसी दूसरे के श्रम पर मोटा होने की जरूरत नही"....। (रायसाहब - मेहता से)
10. " मैं नकली जिंदगी का घोर विरोधी हूँ"...। (मेहता)
11. " मैं इस सिद्धांत का हमेशा समर्थक हूँ कि संसार में छोटे- बड़े हमेशा रहते हैं और होने चाहिए, अन्यथा मानवजाति का सर्वनाश हो जाएगा"....। (मेहता)
12. " जिन्होंने धन और भोग विलास को जीवन का अंग बना लिया वो क्या लिखेंगे"...।(ओंकारनाथ - मालती के लिए)
13. "साहित्य की सेवा अपने जीवन का ध्येय है और रहेगा"..।(ओंकारनाथ)
14. " दौलत के पुजारी तो गली-गली मिलेंगे , मैं सिद्धान्त का पुजारी हूँ"...। (ओंकारनाथ -मालती से)
15." राजनीति के सामने न्याय को कौन पूछता है?"..। (ओंकारनाथ)
16. " मैं उस आदमी को आदमी नहीं समझता जो देश के लिए उद्योग और बलिदान न दे"...। (रायसाहब- स्वयं को)
17. " गड़े रुपये न निकले चाहे कितना ही सूद बढ़ता रहे"..।(झिंगुरीसिंह- होरी से)
18. " जेल से सुराज न मिलेगा, सुराज मिलेगा धर्म और न्याय से"...। (धनिया- गाय मरने पर दरोगा को पैसे न देने पर)
19. "हमको कुल प्रतिष्ठा इतनी नही प्यारी की एक जीव की हत्या कर डालते। उसकी बाँह पकड़ी है मेरे बेटे ने"..। (धनिया - दातादीन से)
20. " लड़की तो हमारे बिरादरी में कुँवारी नही रही, पर मैं बेटी की हत्या नही कर सकता"...। (होरी- पटेश्वरी से झुनिया को बाहर न निकलने पर)
21. " नीच जात लतियाये अच्छा"...। (दातादीन)
22. "संसार तो भय के बल से चलता है। समाज का अंकुश जाता रहे तो देखो क्या क्या होता है"...। (दातादीन- धनिया के लिए झुनिया को न निकलने पर)
23. " पंचो गरीब को सताकर सुख न पाओगे"...। (धनिया)
24. "बिरादरी का वह आतंक था कि अपने पीठ पर लादकर अनाज ढोह रहा था"...। (होरी के लिए)
25. "आदमी का बहुत सीधा होना भी बुरा है"..। (धनिया)
26. "काम सबको प्यार होता है चाम नही"...। (गोबर)
27 " नई सभ्यता का आधार धन है। (लेखक)
28. " मुझे आज नया अनुभव हुआ कि महिला की सहानुभूति हार को जीत बना सकती है"..। (मेहता- कब्बडी के समय मिर्जा खुर्शीद से)
29. " सत्य की चिंगारी असत्य को भस्म कर देती है। (मेहता- वुमेन्स लीग में)
30. " कुत्ता अगर हड्डी की रखवाली करे तो खाये क्या?"..।(रायसाहब- ओंकारनाथ से)
31. " न जाने इन महाजनों से गला छूटेगा की नही"..। (शोभा)
32. " हम जाल में फंसे हैं, जितना फड़फड़ाएंगे उतना फसेंगे"...। (होरी)
33. " सिंहनी से उसका शिकार छीनना आसान नही"..।(गोविंदी- मेहता से)
34. " उसकी वाणी में बल था। डरपोक आदमियों में सत्य भी गूंगा हो जाता है।"..। (गोबर के लिए - जब वह महाजनों को होली के बाद धमका आता है)
35. " जीवन का सुख दूसरों को सुखी करने में है दुखी करने में नही"...। (गोविंदी - खन्ना से)
36. "प्रेम सीधी सादी गाय नही, खूंखार शेर है। जो अपने शिकार पर किसी को आँख भी नही गड़ाने देता"....। (मेहता- मालती से)
37. " जब तक मनुष्य रहेगा उसकी पशुता भी रहेगी"..। (सुर्यप्रताप सिंह)
सहायक ग्रन्थ :-
1 गोदान, प्रेमचंद, वाणी प्रकाशन।