(तमस)
हिंदी साहित्य लोचन hindisahityalochan sahityahindilochan.blogspot.com
● "हिंदी साहित्य लोचन" पर आज आप हिंदी नेट/जे.आर. एफ परीक्षा में चयनित प्रगतिशील विचारो से लैस और मार्क्सवादी सिद्धान्तों व विचारों से सहमत कथाकार "यशपाल" के सर्वप्रसिद्ध- सर्वचर्चित उपन्यास 'झुठासच' के बारे में कुछ विशेष तथ्य जानने की कोशिश करेंगे। आशा करते हैं कि यह जानकारी आपकी परीक्षोपयोगी सिद्ध होगी, साथ ही आपके हिंदी साहित्य के ज्ञान में कुछ वृद्धि कराने हेतु भी योगदान देगी।
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• स्थान:- ढोलइलाही बख़्स व सैयदपुर
• पात्र योजना:-
1. बक्शी जी - कांग्रेस सेक्रेटरी
2. मेहता जी - कांग्रेस प्रधान और बीमा एजेंट।
3. देवराज - अखाड़ा संचालक
4. गोरखा - चौकीदार, जो मुर्गी और छुरी लेके आता है।
5. बोधराज - गुरद्वारे संगठन का नायक
6. ह्यातबख्श - मुस्लिम लीग का नेता
7. रणवीर- जो मुर्गी काटता है
8. शहनवाज़ - जो लालाजी को दंगे से बचाकर गाड़ी में अपने घर ले जाता है।
9. हरनाम सिंह और बंतो- जिनकी दुकान लूट ली जाती है।
10. इकबाल सिंह- जिसे जबरन मुस्लिम बनाया काट है। हरनाम सिंह का बेटा।
11. जसबीर सिंह - हरनाम सिंह की बेटी, लापता होती है।
12. रमजान और एहसान अली- हरनाम सिंह का घर लूटने वाले।
13. अकरा और राजो - रमजान और एहसान अली की पत्नियां।
14. इमामदीन, करीमखान, अब्दुलगनी
15. बिशनसिंह, मुरादअली, नत्थू
16. इत्रफरोश - जिसे रणवीर चाकू मारता है।
(आमुख)
● 1945 के दिल्ली अधिवेशन में लीग ने पाकिस्तान की मांग कर दी थी। लीग के लोगों की हठधर्मिता के कारण 1946 में मंत्रिमंडल अपने मिशन में असफल रहा और लीग ने उस साल पहला देश में संघर्ष विरोधी नारा लगा।
यह उपन्यास 5 दिन की कथा को आधार बनाकर चलता है, जहाँ 1947 के मार्च अप्रैल के माह में हुए भीषण दंगे का वर्णन है।
● " सचमुच लड़ने वालों के पाँव 20वी सदी में और दिमाग मध्ययुग में था"...। (लेखक का मानना तमस के लिए)
● मुरादअली के द्वारा ही दंगे की शुरुआत हुई थी और अंत भी। अमन कमेटी की बस में सबसे तेज नारे लगा रहा था।
(मूल उपन्यास )
मुख्य बातें :-
● " चाहे आप मुझे कुछ भी कह लीजिए, परन्तु अहम सवाल हिन्दुस्तान की आजादी का है, वो भी इन अंग्रेज अफसरों से"....। (हकीमजी - मौलदाद से)
● दुख से छुटकारा पाने के लिए आदमी सबसे पहले औरत के पास ही जाता है"...। (नत्थू के लिए- मोतिया वैश्या के पास जाता है सुअर मारने के बाद और डर के मारे)
●" सोहनसिंह और मीरदाद , दोनों ही अपने अपने लोगों को अमन कायम करने को कह रहे थे और अंग्रेज की चाल से सावधान रहते की भी सलाह दे रहे थे।
●" जिस गाँव में हिन्दू और मुसलमानों के बीच लड़ाई चल रही थी वो सैयदपुर था।
आधार ग्रन्थ :-
1. तमस, साहनी भीष्म, राजकमल प्रकाशन।