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Sunday, July 18, 2021

उपन्यास भाग -10

         

                                (उपन्यास)


हिंदी साहित्य लोचन

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 "हिंदी साहित्य लोचन" पर आप हिंदी के उपन्यास, उनके रचनाकारों व तथ्यों के बारे में व उनकी रचनाओं की विशिष्टताओं पर जानकारी ग्रहण कर सकते हैं। 

 

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उपरोक्त लिंक्स पर जाकर हिंदीसाहित्य के प्रसिद्ध उपन्यासों के चित्रों को देख सकते हैं।


1. प्रभा खेतान :-

" आओ पे पे घर चले" 1990 में अमरीका के 3 शहरों लॉस एंजलिस, सेंट लुइस, न्यूयॉर्क में रहते हुए नारी उत्पीड़न के द्वारा लेखिका ने अपने अनुभवों को साझा किया है।

"तालाबंदी" 1991 में मोमिनपुर इलाके के परिश्रमी साधनहीन किंतु कुशल मारवाड़ी श्याम बाबू की फैक्ट्री के स्थापित समृद्ध और बंद होने की कथा है। इसमें मार्क्सवादी विचारधारा को दिखाया है जो धर्म का रूप लेकर बंगाल में कई फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं। 

" छिन्नमस्ता" 1993 में नारी का जीवन संघर्ष है। पुरुषों के समाज में अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने की कथा।

"पीली आँधी" 1996 में सामंतीय व्यवस्था के उत्पीड़न और अकाल से त्रस्त मारवाड़ी जाति का कलकत्ता आने और इन बेगानी धरती पर अनेक अवरोधों-विरोधों के बावजूद अपने श्रम व व्यापार के बल पर व्यवस्थित है।

                                                  

2. मैत्रयी पुष्पा :-

 "बेतवा बहती रही " 1993 में गरीब परिवार में जन्मी, कम पढ़ी-लिखी उर्वशी की कथा है।  विवाह के बाद उसका प्यार जल्द ही छिन जाता है और वह कम उम्र में ही विधवा हो जाती है।

" चाक" 1997 में अलीगढ़ के पास अंतःपुर गाँव में अनेक जातियों की स्त्रियां है जिन पर जाटों का वर्चस्व है और उनके शोषण से दमघोंटू जीवन जी रही हैं।

"झुलानट" 1999 में बुंदेलखंड के एक परिवार की कथा है।

" अल्मा कबूतरी" 2000 में कबूतर जाति में जन्मी अल्मा की संघर्ष की कथा है। अंग्रेज़ो ने इन्हें जरायम पेशी घोषित किया परन्तु यह अपना सम्बन्ध रानी पद्मावती, झलकारीबाई से जोड़ते हैं।

"कहि ईसुरी फाग" 2004 में ईसुरी के फाग बुंदेलखंड में प्रसिद्ध है। ईसुरी के रजऊ की प्रेमकथा का वर्णन है।

"त्रियाहट" 2005 में उर्वशी नामक विधवा लड़की की कहानी है। उसका अपराध यही है कि वह अपने अनुसार जीवन जीना चाहती है।

"फरिश्ते निकले" 2014 में ग्रामीण स्त्रियों पर हो रहे अत्याचारों की कथा है जहाँ नायिका "बेला"एक समय तक सबकुछ सहती है पर अंततः वह ताकतवर स्त्री के रूप में तब्दील होती है।

                                                    

3. मधु कांकरिया :-

 "आखिरी सलाम" 2002 में वेश्याओं के जीवन पर आधारित है।

"पत्ताखोर" 2005 में बढ़ती नशाखोरी के भीषण और घातक परिणाम की ओर ध्यान आकृष्ट करता है।

"सेज पर संस्कृत" 2008 में जैन साध्वियों के जीवन के अन्तरबाध्य में झाँकता हुआ, स्त्री अस्मिता के प्रश्नों को उठाता है। महावीर के निर्वाण के 843 वर्षों बाद जैन धर्म की आचार संहिता लिखकर मनमानी कर रहे हैं। 

"खुले गगन के लाल सितारे" 2012 में नक्सलवादी आंदोलन को केंद्र में रखकर लिखा गया है।


4. जया जादवानी :-

" मीठो पाणी खारों पाणी" 2013 में सिंध के 5000 साल के इतिहास को छोटे छोटे खण्ड में बांटकर दिखाया गया है।

"मीठा पानी सिंध का और खारा पानी अरब सागर का।

                                              

5. अनामिका  :-

" तिनके तिनके के पास" 2008 सेक्स वर्कर की बेटी तारा की माँ के देहांत के बाद कॉलगर्ल बनकर पढाई करती है। नई मध्यवर्गीय स्त्री के जटिल यथार्थ का चित्रण है।

                                                     

6. क्षमा कौल :-

"निक्की तवी पर रिहर्सल" 2013 में कश्मीर आतंकवाद पर लिखा है। विकृत राजनीति को भी दिखाया है। जम्मू में 2 महीने तक चल रहे आंदोलन जिसे "बम-बम भोले" नाम से भी जाना जाता है जिसमे जबरिया सेक्यूलर चेहरे और असहज को दिखाया है।

                                                       

● सहायक ग्रन्थ :- 

1. हिंदी साहित्य का इतिहास- रामचंद्र शुक्ल, वाणी प्रकाशन, 2018 संस्करण।

2. हिंदी साहित्य का इतिहास , विजेंद्र स्नातक, साहित्य अकादमी प्रकाशन,1996 प्रथम संस्करण। 

3. हिंदी साहित्य का उद्भव और विकास, हजारीप्रसाद द्विवेदी।

4. हिंदी साहित्य और संवेदना का विकास, रामस्वरूप चतुर्वेदी, लोकभारती प्रकाशन, 2018 , 25वां संस्करण।

5. हिंदी साहित्य का सरल इतिहास, विश्वनाथ त्रिपाठी, ओरियंटल प्रकाशन, संस्करण 2018

6. हिंदी साहित्य का दूसरा इतिहास, बच्चन सिंह, राधाकृष्ण प्रकाशन, 10वां संस्करण 2018

7. राजभाषा हिंदी वेबसाइट -' उपन्यास की परिभाषा' मनोज कुमार।

8. हिंदी उपन्यास विकिपीडिया।

9. हिंदी का गद्य साहित्य , रामचंद्र तिवारी, 12वां संस्करण, 2018, काशी


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