(झुठासच)
हिंदी साहित्य लोचन
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● "हिंदी साहित्य लोचन" पर आज आप हिंदी नेट/जे.आर. एफ परीक्षा में चयनित प्रगतिशील विचारो से लैस और मार्क्सवादी सिद्धान्तों व विचारों से सहमत कथाकार "यशपाल" के सर्वप्रसिद्ध- सर्वचर्चित उपन्यास 'झुठासच' के बारे में कुछ विशेष तथ्य जानने की कोशिश करेंगे। आशा करते हैं कि यह जानकारी आपकी परीक्षोपयोगी सिद्ध होगी, साथ ही आपके हिंदी साहित्य के ज्ञान में कुछ वृद्धि कराने हेतु भी योगदान देगी।
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● प्रमुख तथ्य व अन्य बातें :-
"सच" को कल्पना के रंग में रंग कर उसी जन समुदाय को सौंपने जा रहा हूँ जो सदा "झूठ" से ठगा जाकर भी सच के लिए अपनी निष्ठा नही छोडता"....।(भूमिका से)
प्रस्तुत कथन बहुत ही महत्वपूर्ण है साथ ही इसमें लेखक ने अपनी मंशा भी व्यक्त कर दी है, की वह किस सन्दर्भ में इस रचना को पाठकों व हिंदी साहित्य जगत के सामने पेश कर रहा है। लेखक साफ शब्दों में कह रहा है कि भले ही आज तक हम झूठ से ठगे जाते रहे हैं बावजूद उसके हममें एक विश्वास बना रहता है जो सच्चाई के साथ खड़ा है। यकीनन हम उस सत्य को पा सकेंगे जिसके लिए निरंतर हम जूझ रहे हैं। इस कथन को पढ़ते हुए मुझे दिल्ली विश्विद्यालय , हिंदी विभाग के प्रो. चंदन कुमार जी का कथन याद आ रहा है जो वह सदैव पढ़ाते वक्त कहा करते थे। खासतौर पट जब सांस्कृतिक सन्दर्भ पढ़ाया जाता था। वह कथन था कि " कुछ हस्ती है हमारी कि जो मिटती ही नहीं"....। इस कथन का सन्दर्भ भारतीय संस्कृति में भरपूर मात्रा में भरी उस अपराजय जिजीविषा व ऊर्जा से है जिसको हमने कभी नहीं छोड़ा। इसी बात में एक और बात जोड़ना चाहूँगा जोकि कथासम्राट प्रेमचंद के "रंगभूमि" उपन्यास के नायक "सूरदास" द्वारा उसकी झोपड़ी गिरा देने के सम्बंध में कही गई है - "तुम जितनी बार गिराओगे हम उतनी बार बनायेनंगे"...।
हम पर न जाने कितने ही आक्रमण, छल-कपट,घात-प्रतिघात हुए फिर भी हम आगे बढ़ते गए । हमने कभी पीठ पर वार करना नहीं सीखा। और इस संदर्भ में न जाने कितनी ही रचनाएँ हमारी हिंदी साहित्य की अमूल्य निधि बनकर सामने आई है और न जाने कितने साहित्यकार भी। मुझे आवश्यकता नहीं समझ आती की मैं जहाँ उनका ज़िक्र करूँ।
मुख्य पात्र योजना :-
1. रामजवाया :- बड़ा बेटा
2. मास्टर रामलुभाया :- छोटा बेटा, आर्यसमाजी
3. तारा :- कम्युनिस्ट विचारधारा से प्रभावित
4. जयदेव :- दयालसिंह कॉलेज से , गुप्त आंदोलन करता है, तारा का भाई
5. प्रो- प्राणनाथ :- जयदेव के गुरु
6. कनक :- 1942 आंदोलन में भाग लेती है
7. लेखराम शर्मा :- पैरोकार का उपसम्पादक (पत्रिका)
8. नैयर:- कनक का जीजा, हाईकोर्ट में वकील
9. ईश्वरकोर :- हिन्दू सभाकमेटी की सदस्य
10. महेश :- पैरोकार का संवाददाता
11. कशिश " कर्मचन्द" : पैरोकार का सम्पादक
● गौण पात्र:-
1. टीकाराम :- इंसोरेंस कंपनी से
2. बिरुमल :- डाक का कर्मचारी
3. भागवंती :- तारा की माँ
4. गुर्टू, सुरेंद्र और अमृता :- तारा की सहेली
5. नरेंद्र :- स्टूडेंट फेडरेशन के नेता
6. गोविंदराम:- pwd क्लर्क
7. कालीचरण
8. राधेबिहारि :- पैरोकार के मालिक
9. प्रो- दीन मुहम्मद :-जो सोमनाथ को नकल करते पकड़ता है
● पत्रों (पत्रिका) के नाम:-
1. पैरोकार
2. निशांत
3. छत्रपति
4. सियासत
● मुख्य :-
• जयदेव जिन दिनों जेल में था वही रहते उसने एक कहानी संग्रह लाहौर से निकाल दिया था।
• " विद्या चाहे कितनी ही अनमोल क्यों न हो,परन्तु पैसे के अभाव में अप्राप्य हो होती है".।(तारा की पढ़ाई के सम्बंध में)
• पत्रकार का काम अपने मालिक के इशारो को किनारे रखकर काम की विशेषता को रंग देना है".।(पत्रकारिता के लिए)
• "पुरूष की तुलना में स्त्री की हीनता स्वाभाविक तो नही , परन्तु बना दी गयी है"..।(तारा की पढ़ाई को रोकने के लिए)
• "हमारी असली लड़ाई तो अंग्रेज से है जिसने मुल्क पर कब्जा किया हुआ है"...।(तारा)
•" विदेशी गुलामी से मुक्ति के लिए पहले हिन्दू-मुस्लिम- सिख एकता अनिवार्य है"...।(जयदेव)
● कथा में शामिल पार्टियो के सदस्य:-
1.कांग्रेस :- गोपीचंद, भीमसेन , राधेबिहारि, कपूर, शन्नो ।
2. मुलिम लीग :- अल्लामा मिशनरी, खान मामेदार
3. कम्युनिस्ट :- असद, हजारासिंह, प्रद्युम , सर खिजर
4. सिख गुट :- तारा सिंह।
आधार ग्रन्थ
1.झुठासच, यशपाल, राजकमल प्रकाशन,
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