आदिकाल पर संक्षिप्त व तथ्यात्मक जानकारी
●आदिकालीन साहित्य के संदर्भ में विश्वनाथ त्रिपाठी का मत :-" इस काल में संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश में भी रचनाएं हो रही थी साथ-साथ अपभ्रंश के केंचुल को छोड़ती हुई हिंदी भी अपना रूप ग्रहण कर रही थी"....।
1 (हिंदी का प्रथम कवि)
चन्दबरदाई शुक्ल
अब्दुर्रहमान हजारीप्रसाद
स्वयम्भू रामकुमार वर्मा
सरहपा राहुल सांकृत्यायन
शालीभद्र सूरी गनपतिचन्द्र गुप्त
गोरखनाथ मिश्रबन्धु
देवसेन डॉ नगेन्द्र
2 (आदिकालीन सिद्ध शिष्य परम्परा)
769ई. 773ई. 780ई. 820ई.
सरहपा लुइपा शबरपा कण्हपा
●लुइपा के दो और शिष्य थे- उड़ीसा के राजा दारिकपा और वहाँ के मंत्री गोणिपा।
3 (आदिकालीन नाथयोगी शिष्य परम्परा)
आदिनाथ(शिव)-जलंधरनाथ-मत्स्येन्द्रनाथ-गोरखनाथ-गेंगीनाथ-निवृत्तिनाथ-चर्पटनाथ
4 (आदिकालीन गद्य साहित्य)
1 उद्योतन सूरी - "कुवलयमाला कथा" 773 ई. में रची गयी थी।
2 ज्योतिश्वर ठाकुर - "वर्णरत्नाकर" 13-14वी शती के आसपास लिखी गई थी। ये गद्य-पद्य मिश्रित मैथिली और अपभ्रंश भाषा मे लिखी है। जिसमें 8 कल्लोल हैं और नगर,नायिका,नखशिख वर्णन,ऋतु वर्णन आदि का वर्णन है।
3 रोड़ा कवि- "राउरवेल" हिंदी की प्रथम चम्पू और श्रृंगारिक काव्य है जोकि मैथिली-अपभ्रंश में लिखी है। इसमें नखशिख वर्णन के साथ नायिका वर्णन भी है। इसकी रचना 10वी शती में की गयी थी।
4 दामोदर शर्मा- "उक्ति-व्यक्ति प्रकरण" एक तरह का व्याकरण ग्रन्थ है जिसकी रचना 12वी शती में हुई थी।इसकी रचना "काशी नरेश गोपीचन्द" के राजकुमारो को वहां की स्थानीय भाषा सीखाने के लिए की गई थी। दामोदर शर्मा गोपीचन्द के सभाकवि थे। 5 प्रकरण में बंटे होने से इसका नाम "प्रकरण" पड़ा।
5 लक्ष्मीधर :- "प्राकृत पैंगलम" रचना एक तरह का छंदशास्त्र है जिसमें कई राजाओं, जैसे हम्मीर, बब्बर, जज्जल, विद्याधर आदि का वर्णन है। इसके अतिरिक्त 900ई. से लेकर 1400ई. तक के आसपास की कई घटनाओं का भी वर्णन किया है जिसकी प्रमाणिकता बच्चन सिंह के साथ सुनीतिकुमार चटर्जी भी करते हैं। इसका एक अन्य नाम पिंगल-सूत्र भी है।
इसकी टीका वंशीधर ने लिखी थी।
5 (आदिकालीन श्रृंगारिक साहित्य)
1 बीसलदेव रासो नरपति नाल्ह 1212 ई.
2 राउरवेल रोड़ा कवि 10वी शती
3 विद्यापति की पदावली विद्यापति 14वी शती
4 सन्देशरासक अब्दुर्रहमान 12वी शती
6 (आदिकालीन लौकिक साहित्य)
●जिस भी साहित्य में लोक समाज, लोकभाषा, लोकसंस्कृति, लोकगीत, लोकसंगीत, मिथकों आदि का मुखर रूप से प्रयोग हुआ होता है।उसे लौकिक साहित्य कहते हैं। यह साहित्य पूरी तरह से सामान्य जनजीवन से जुड़ा होता है। इसमें साहित्य की परिनिष्ठिता और उसकी नियमावली न के बराबर होती है। इसके कुछ उदाहरण आप देख सकते हैं।
1 सम्पूर्ण रास काव्य परम्परा
2 खुसरों की पहेलियां, ढ़कोसला, मुकरियाँ
7 (आदिकालीन परिनिष्ठित साहित्य)
1 विजयपाल रासो - नलसिंघ
2 हम्मीर रासो - शार्गंधर
3 कीर्तिलता - विद्यापति
4 कीर्तिपताका - विद्यापति...। (शुक्लानुसार)
8 (आदिकालीन प्रबन्ध साहित्य)
1 पृथ्वीराज रासो - 1250ई. - चन्दबरदाई
2 पउम चरिउ - 8वी शती - स्वयंभू
3 महापुराण - 10वी शती- पुष्पदंत
9 (आदिकालीन खण्डकाव्य)
1 बीसलदेव रासो- नरपति नाल्ह 1212 संवत
2 सन्देशरासक- अब्दुर्रहमान 12वी शती
3 कीर्तिलता- विद्यापति -14वी शती
4 कीर्तिपताका - 14वीं शती
5 जयचंद प्रकाश - भट्ट केदार 12शती
6 जयमयंक जसचन्द्रिका- मधुकर कवि 12वी शती
10 (आदिकालीन साहित्य में प्रथम प्रयोक्ता)
1 दोहा का प्रथम प्रयोक्ता - जोइन्दु
2 दोहा-चौपाई का प्रथम प्रयोक्ता- सरहपा
3 प्रथम रास परम्परा का प्रयोक्ता- जिनदत्त सूरी (उपदेशरसायन रास में)
4 हिंदी का प्रथम रास काव्य परम्परा का प्रयोक्ता- शालीभद्र सूरी (भारतेश्वर बाहुबली रास में)
5 कुंडलिया का प्रथम प्रयोक्ता - शार्गंधर
6 प्रथम भारतीय भाषा मे लिखने वाला इस्लामिक लेखक (अब्दुर्रहमान का संदेशरासक अवधी में )
7 कडवक का प्रथम प्रयोक्ता
8 बारहमासा का प्रथम प्रयोक्ता- नरपति नाल्ह (बारहमासा में)
9 श्रृंगार और नखशिख का प्रथम प्रयोक्ता- रोड़ाकवि (राउरवेल में)
10 प्रथम व्याकरणिक ग्रन्थ- उक्ति-व्यक्ति प्रकरण- (दामोदर शर्मा)
11 पध्दडिया बंध का प्रथम प्रयोक्ता - चतुर्मुख (स्वयम्भू के अनुसार)
पध्दडिया-अहिलल्ल-कडवक एक ही तरह के छंद हैं।
सहायक ग्रन्थ :-
1 हिंदी साहित्य का इतिहास- रामचंद्र शुक्ल, वाणी प्रकाशन, 2018 संस्करण।
2 हिंदी साहित्य का इतिहास , विजेंद्र स्नातक, साहित्य अकादमी प्रकाशन,1996 प्रथम संस्करण।
3 हिंदी साहित्य का उद्भव और विकास, हजारीप्रसाद द्विवेदी।
4 हिंदी साहित्य और संवेदना का विकास, रामस्वरूप चतुर्वेदी, लोकभारती प्रकाशन, 2018 , 25वां संस्करण।
5 हिंदी साहित्य का सरल इतिहास, विश्वनाथ त्रिपाठी, ओरियंटल प्रकाशन, संस्करण 2018
6 हिंदी साहित्य का दूसरा इतिहास, बच्चन सिंह, राधाकृष्ण प्रकाशन, 10वां संस्करण 2018
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