सूफ़ीकाव्य
● अन्य सूफ़ी प्रेमकाव्य :-
1. हंसावली :- प्रस्तुत रचना सूफी कवि "असायत" की मानी गई है जोकि 1370 ई. में आई थी। इस रचना का स्त्रोत "विक्रम बैताल" की कथा है। इसमें पाटन की राजकुमारी हंसावली की कहानी है।
2. चंदायन :- इसकी रचना 1379 ई.में मुल्ला दाऊद ने की थी। रामकुमार वर्मा इसे "हिंदी का प्रथम सूफ़ीकाव्य" मानते हैं। डॉ माताप्रसाद गुप्त ने इस ग्रँथ को "लोरकथा" या "लोरकहा" कहा है। परमेश्वरी लाल ने "चंदायन" नाम से इसका संपादन किया था।
इस ग्रँथ में 5 अर्धलियो या चौपाई के बाद दोहा रखकर "कडवक" की शैली बनाई है। इसका नायक "लोर" और नायिका "चंदा" है। यह अवधी भाषा का प्रथम उपलब्ध ग्रँथ माना जाता है। इसमें भारतीय काव्यपरंपरा और फ़ारसी मसनवी शैली का प्रयोग किया है।
3. सत्यवती कथा :- इसकी रचना ईश्वरदास ने 1501 ई. में की थी। इसमें "सत्यवती" और "ऋतुवर्ण" की कथा चलती है जिसमें नायिका नायक को शाप दे देती है, जिसके कारण वो कोढ़ी हो जाता है । ततपश्चात कुछ समय बाद नायिका को नायक से प्रेम हो जाता है और वो उसकी सेवा तनमन से करने लगती है। इसके बाद सत्यवती ऋतुवर्ण के सुंदर शरीर के लिए देवताओं से याचना करती है जिसमें वो सफल होती है और दोनों साथ में रहना शुरू कर देते हैं।
इस ग्रँथ में भी 5-5 चौपाई के बाद दोहा रखकर "कडवक" की शैली अपनायी है। इसमें 58 दोहों पर कथा का समापन है।
• शुक्ल के अनुसार अवधी की सबसे पुरानी रचना ईश्वरदास की " सत्यवती कथा" है।
4. मृगावती :- कुतुबन की यह रचना 1503 ई. में आई थी। जिसमें एक नायक और दो नायिकाओ की रचना करके रचनाकार ने विशेष प्रकार की रचना सूफ़ीकाव्य में प्रदान की है। कुतुबन "शेख बुरहान" के शिष्य थे और बादशाह जौनपुर के आश्रित कवि।
• शुक्ल जी इसे "प्रथम सूफ़ीकाव्य" मानते हैं।
मुख्य नायक "रूपमुरारी" और नायिका "मृगावती" है व उपनायिका रुक्मिणी है ।
• इस कथा की नायिका उड़ने की कला जानती है।
5. "मधुमालती:- इसकी रचना मंझन ने 1545ई. में की थी। इसमें नायक-नायिका के अतिरिक्त उपनायक और उपनायिका का भी ज़िक्र किया गया है। इसका मुख्य नायक "मनोहर" और नयिका "मधुमालती" है। जिसमें करनेस नगर के राजा सूरजभान के पुत्र मनोहर को सोते हुए रातोंरात अप्सराएं मधुमालती के चित्रसारी में रख आती है और दोनों के साक्षात्कार होते ही दोनों एक दूसरे पर मोहित हो जाते हैं। और बाद में दोनों का विवाह हो जाता है।
उपनायक "ताराचंद" और नायिका "प्रेमा" है।
यह अवधी भाषा में लिखा हुआ काव्य है जोकि 5 अर्धलियो के बाद दोहा रखकर "कडवक" बनाया गया है।
• सूफ़ीकाव्य के अंतर्गत पहली बार किसी काव्य में "बहुपत्नीवाद" का अभाव रहा है।
6. चित्रावली :- इसकी रचना 1613 ई. में उसमान ने की थी। ये गाजीपुर के रहने वाले थे और शाह "निजामुद्दीन चिश्ती" की शिष्य परम्परा में "हाजीबाबा" के शिष्य थे। अपनी रचना के शुरुआत में फ़ारसी मसनवी शैली का प्रयोग किया है।
• शुक्लानुसार चित्रावली में कवि में पूरी तरह से "पद्मावत का अनुसरण" किया है।
कथा में नेपाल के राजा धरणीधर के पुत्र "सुजानकुमार", "चित्रावली" का चित्र देखकर मोहित हो जाता है और नायिका भी नायक को देखकर उस पर मोहित हो जाती है। कथा के अगले चरणों मे नायक अंधा हो जाता है और एक वनमानुष के अंजन देने से नायक की आँखे वापस आ जाती है। उसके पश्चात नायक-नायिका विवाह कर लेते है।
कुछ दिनों बाद सारंगढ़ की कँवलावती भी सुजानकुमारा से प्रेम करने के पश्चात उससे विवाह कर लेती है अंततः दोनों रानियो के साथ नायक बहुत दिनों तक राज्य करता है।
• उसमान ने भी जायसी की तरह 7-7 चौपाई पर दोहा रखकर "कडवक" अपनाया है।
7. रसरत्न :- इसकी रचना "पूहकर" नामक कवि ने की थी जोकि अकबर के दरबारी "दुर्गावास" के प्रपौत्र थे।
नायक सोम और नायिका रम्भा के प्रेम का चित्रण है।
8. ज्ञानदीप :- 1619 ई.में आई यह रचना "शेखनबी" की मानी जाती है। जिसमें राजा ज्ञानदीप और रानी देवयानी की कथा कही गई है। शेखनबी जहँगीर के समय थे।
इसमें नायक की खोज के लिए स्वयंवर होता था।
• शेखनबी ने मुस्लिम होते हुए भी वैदिक मार्ग की प्रशंसा की थी।
9. इंद्रावती :- इसकी रचना नूर मुहम्मद ने 1744 ई. में की थी। जिसमें कालिंजर के राजा "राजकुंवर" और आजमपुर की रानी "इंद्रावती" की कहानी है। इसकी रचना भी 5-5 चौपाई पर 1 दोहा रखकर "कडवक" की रचना की है।
• अपनी इस रचना के लिए उन्हें कई बार ये तक सुनने को मिलता था की "तुम मुसलमान होकर भी हिंदी की रचना क्यों करते हो?....।
इनकी एक अन्य रचना "अनुराग बासुरी" है जोकि 1764 ई.में आई थी। यह एक तरह का फारसी भाषा मे लिखा गया ग्रँथ है। इसमें शरीर, जीवात्मा और मनोवृतियों को लेकर अधिक पांडित्यपूर्ण रखने की कोशिश की है।
10 . हंसाजवाहिर :- यह सूफीकवि "कासिमशाह" की रचना है, जिसमें राजा हंस और रानी जवाहिर की कथा कही है। इसमें भी जायसी का अनुसरण किया है।
11. "कथारूपमंजरी" :- इसकी रचना "जानकवि" ने की है।
• डॉ नगेन्द्र के अनुसार यह "प्रथम रचना" है जिसे हिंदी में फ़ारसी के "लैला-मजनू" की रचना है।
12. पूरे सूफी आख्यानों में केवल एक हिन्दू मिलता है जिसने प्रेमाख्यान काव्य लिखा । "सूरदास" नामक पंजाबी कवि ने "नल दमयंती" की रचना की थी।
● सहायक ग्रन्थ :-
1. हिंदी साहित्य का इतिहास- रामचंद्र शुक्ल, वाणी प्रकाशन, 2018 संस्करण।
2. हिंदी साहित्य का इतिहास , विजेंद्र स्नातक, साहित्य अकादमी प्रकाशन,1996 प्रथम संस्करण।
3. हिंदी साहित्य का उद्भव और विकास, हजारीप्रसाद द्विवेदी।
4. हिंदी साहित्य और संवेदना का विकास, रामस्वरूप चतुर्वेदी, लोकभारती प्रकाशन, 2018 , 25वां संस्करण।
5. हिंदी साहित्य का सरल इतिहास, विश्वनाथ त्रिपाठी, ओरियंटल प्रकाशन, संस्करण 2018
6. हिंदी साहित्य का दूसरा इतिहास, बच्चन सिंह, राधाकृष्ण प्रकाशन, 10वां संस्करण 2018
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