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Sunday, March 7, 2021

भक्तिकाल भाग : 9

 

सूफीकाव्य पर अन्य जानकारी


1. सूफ़ीकाव्य के अंतर्गत  आने वाली रचना "सत्यवती कथा" जिसके रचनाकार ईश्वरदास हैं, उन्हें शुक्ल जी ने सूफ़ीकाव्य में नहीं रखा है।

2. रामस्वरूप चतुर्वेदी के अनुसार पदमावती के प्रति रत्नसेन का प्रेम "साधनात्मक" है और नागमती का प्रेम रत्नसेन के प्रति "ग्रास्थिक"।

3.  पद्मावत की हस्तलिखित प्रत्तियां ज़्यादातर फारसी में लिखी है।

4.  "गौरीशंकर ओझा" ने पद्मावती की कथा को कल्पना प्रसूत माना है।

5.  "विजयदेवनारायण साही" ने जायसी को शुद्ध सूफीकवि माना है।

6. गोरा-बादल की वीरतापूर्ण कथा पद्मावत का एक अन्य मुख्य प्रसंग है।

7.  बच्चन सिंह के अनुसार "कासिमशाह" की रचना घटिया और जायसी का अनुकरण है।

8.  सूफ़ीकाव्य में 5 चौपाई के बाद दोहा रखने पर "कडवक" शैली बनती है जिसे ज्यादात्तर सूफी कवियों ने अपनाया है। इसमें मृगावती, मधुमालती, इंद्रावती, सत्यवती कथा, चंदायन, माधवानल कामकंदला आदि आते हैं।

9.  चौपाई के बाद दोहा रखकर "कडवक शैली" पद्मावत और चित्रावली में अपनाई है।

10.  शुक्ल जी ने सूफ़ीकाव्य परम्परा में "इंद्रावती" को अंतिम कथा माना है जोकि समस्त सूफ़ीकाव्य परम्परा में एकलौती अखंडित काव्य है।

11. भक्तों में आंडाल, संतो में सहजोबाई और सूफियो में राबिया नामक महिला कवि रही है।

12. शुक्ल जी ने सूफी काव्य को साहित्य कोटि में रखा है।


● पद्मावत के प्रतीक चिन्ह :-

चित्तौड़ -        शरीर का

रत्नसेन -        मन का

पद्मावती -       बुद्धि का

नागमती -       संसार

राघवचेतन -    शैतान का

अलाउद्दीन -    माया का

तोता -            गुरु का

सिंघलदीप -    हृदय का


● प्रथम सूफी रचना विद्वानों के अनुसार  :-

हंसावली            नगेन्द्र और गनपतिचन्द्र गुप्त

चंदायन              रामकुमार वर्मा

मृगावती             शुक्ल

सत्यवती कथा    हजारीप्रसाद


● सूफ़ीकाव्य नायक नायिका :-

मधुमालती - मनोहर व मधुमालती और  ताराचंद व प्रेमा

पदमावत -  रत्नसेन, पद्मावत व नागमती

सत्यवती कथा - ऋतुवर्ण व सत्यवती

चित्रावली - सुजानकुमार व चित्रावली और कँवलावती

मृगावती - राजकुमार व मृगावती और रुक्मिणी

ज्ञानदीप - ज्ञानदीप व देवयानी

इंद्रावती - राजकुमार व इंद्रावती

हंसाजवाहिर - हंस व जवाहिर

● ज्ञानाश्रयी और प्रेमाश्रयी शब्द पर विवाद :-

"बच्चन सिंह" शुक्ल जी द्वारा भक्तिकाल के दिए गए नामों पर विवाद खड़ा करते हैं और कहते हैं कि "क्या ज्ञानाश्रयी कवियों में प्रेम नहीं ? प्रेममार्गी कहने से सूफियो असूफियो में भेद नहीं दिखता ? इस वर्गीकरण के स्थान पर संतकाव्य और सूफ़ीकाव्य कहना ज़्यादा तर्कसंगत है"....।   


● सहायक ग्रन्थ :- 

1. हिंदी साहित्य का इतिहास- रामचंद्र शुक्ल, वाणी प्रकाशन, 2018 संस्करण।

2. हिंदी साहित्य का इतिहास , विजेंद्र स्नातक, साहित्य अकादमी प्रकाशन,1996 प्रथम संस्करण। 

3. हिंदी साहित्य का उद्भव और विकास, हजारीप्रसाद द्विवेदी।

4. हिंदी साहित्य और संवेदना का विकास, रामस्वरूप चतुर्वेदी, लोकभारती प्रकाशन, 2018 , 25वां संस्करण।

5. हिंदी साहित्य का सरल इतिहास, विश्वनाथ त्रिपाठी, ओरियंटल प्रकाशन, संस्करण 2018

6. हिंदी साहित्य का दूसरा इतिहास, बच्चन सिंह, राधाकृष्ण प्रकाशन, 10वां संस्करण 2018 

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