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Thursday, July 15, 2021

उपन्यास भाग - 9

           

                          (उपन्यास)


हिंदी साहित्य लोचन

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● "हिंदी साहित्य लोचन" पर आज आप हिंदी साहित्येतिहास परम्परा के एक भाग जिसे "आधुनिक काल" के नाम से जाना जाता है। आज हम हिंदी गद्य विधा में उपन्यास, उपन्यासकारों व तथ्यों' पर विशेष रूप से ध्यान देंगे । आशा करते हैं कि यह जानकारी आपकी परीक्षोपयोगी सिद्ध होगी, साथ ही आपके हिंदी साहित्य के ज्ञान में कुछ वृद्धि कराने हेतु भी योगदान देगी। 

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 "हिंदी साहित्य लोचन" पर आप हिंदी के उपन्यास, उनके रचनाकारों व तथ्यों के बारे में व उनकी रचनाओं की विशिष्टताओं पर जानकारी ग्रहण कर सकते हैं। 

 

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उपरोक्त लिंक्स पर जाकर हिंदीसाहित्य के प्रसिद्ध उपन्यासों के चित्रों को देख सकते हैं।


1. कृष्णा सोबती :-

" सूरजमुखी अंधेरे के" 1972 में नारी जीवन की मनोवैज्ञानिक समस्या को उभारा है। रत्ती जिसका बचपन मे बलात्कार हुआ था वह अब मनोवैज्ञानिक प्रभाव से जूझ रही है।

"जिंदगीनामा" 1979 में पंजाब की संस्कृति और वहाँ के रेशे रेशे को समझने के लिए अच्छा उपन्यास है। देवराज उपाध्याय के शब्दों में " यदि किसी को पंजाब की संस्कृति, रहन-सहन, चाल-ढाल, इतिहास आदि की जानकारी तो "जिंदगीनामा" से अन्यत्र कहीं ओर जाने की जरूरत नहीं"...।

लेखिका का सबसे प्रसिद्ध उपन्यास है।

"दिलो दानिश" 1993 में दिल्ली के रईश परिवार के बहाने भारतीय नारी की व्यथा दिखा दी है।

  

2. मन्नू भंडारी :-

"आपका बंटी" 1971 में मध्यवर्गीय समाज मे तलाक जैसी समस्या का प्रभाव किस तरह से बच्चों पर पड़ता है उसका जीवंत चित्रण किया है। शकुन, अजय और बंटी की कथा है।

"महाभोज" 1979 में लेखिका का राजनीतिक उपन्यास है जिसमें दलित लोगों को किस तरह से शोषित किया जाता है और अंततः उसकी "बिसेसर" (बिसु) हत्या कर के उसके साथी बिंदा को ही उसका हत्यारा बना दिया जाता है। राजनीतिक स्वार्थ किस हदतक जा सकता है इसका जीता जागता प्रमाण है यह उपन्यास।

                                                      

3. उषा प्रियम्वदा :-

"55 खंभे लाल दीवारें" 1961 में सुषमा को केंद्र में रखकर आधुनिक नारी की मानसिक यन्त्रणा का अंकन किया है।

" अन्तर्वशी" 2000 अमरीका में प्रवास करने वाले भारतीयो को कथा। लेखिका ने मुक्त यौन संबंध को विशेष रूप से दिखाया है।

"भया कबीर उदास" 2007 नायिका लिली पांडेय के माध्यम से नारी की छटपटाहट और मृत्यु से उतपन्न भय का ही मार्मिक चित्रण किया है।

 

4. राजी सेठ :-

"तत्सम" 1983 में स्त्री पुरुष के सम्बंध पर विवेचित है। विश्विद्यालय स्तर के खोखलेपन को भी दिखाया गया है।

"निष्कवच" 1995 में भारतीय और पश्चिमी संस्कृति मे अंतर दिखाया है कि पश्चिम में रहने वाले लोगों को वह नरक और भारत मे रहने वालों को स्वर्ग लगता है। पश्चिम में रिश्ते देह के आधार पर बनते हैं, वयस्क होने के बाद लड़का-लड़की को अकेले छोड़ दिया जाता है परन्तु भारत इससे विपरीत है। यहाँ लंबे समय तक परिवार पर ही बच्चे आश्रित रहते हैं और यहाँ के रिश्ते भावनाओ और संस्कृति, मर्यादा से जुड़े हैं जो लंबे समय तक चलते हैं।

"उनके हिस्से की धूप" , "चितकोबरा" में नारी स्वतंत्रता , प्रेम विवाह, वैवाहिक जीवन की समस्या, ऊब व ताजगी से छुटकारा पाने के लिए पर पुरुषों की तरफ जाना ये सब इन 2 उपन्यास में है।

"अनित्य" 1980 में गाँधीवादी की व्यर्थता और भगतसिंह की का क्रांतिकारी आंदोलन को दिखाया है।

"कठगुलाब" 1996 में पुरुष प्रधान समाज मे नारी की दुर्व्यवस्था का चित्रण।

"मिलजुल मन" 2009 लोगों के मोहभंग को दिखाया है। 

                                                     

5. चंद्रकांता :-

 "बाकी सब खैरियत है" 1983 में दिखाया है कि किस तरह से सयुंक्त परिवार का एक लड़का विदेश जाकर सारे रिश्तों को ताक पर रख देता है और भावनात्मक रूप से अलग हो जाता है। विदेशीपन इतना लुभाता है कि अपने परिवार को भूल जाता है।

"एलान गली जिंदा है"  1984 कश्मीर की एक गली का चित्रण है जहाँ सदी गली मान्यता है। पीढ़ियों के अंतर्विरोध दिखता है।

                                                    

6. कुसुम कुमार :-

"हीरामन हाईस्कूल" 1989 में एक विधवा अकेली स्त्री के जीवन संघर्ष की कथा है जहाँ वह अपने 2 पुत्रियों को पालपोष कर जिजीविषा का उदहारण देती है।

                                                  

7. ममता कालिया :-

" दुक्खम-सुखम" 2010 बीसवीं शती की पृष्ठभूमि पर लिखा है। इसके सूत्र दिल्ली, आगरा,बम्बई तक फैले हैं। गांधी के चरखा से आत्मबल और विभाजन की त्रासदी।

"कल्चर वल्चर" 2017 में कला, साहित्य और संस्कृति आज सरोकार न रहकर कारोबार बनता जा रहा है। कारोबारियों के हाथ मे जाकर ये संस्कृति विकृति हो गई है और साहित्य वाहित्य बन गया है।


8. चित्रा मुद्गल :-

" आँवा" 1999 में बम्बई के मजदूरों का संघर्ष दिखाया है। जिसमे ट्रेड यूनियन कठपुतली बन गयी है और समाज का कोई भी वर्ग और क्षेत्र क्यों न हो वहाँ नारी उत्पीड़न अवश्य ही है,यह समस्या है।   

"गिलिगुड" 2002 में युवा पीढ़ी बुज़ुर्ग की घोर उपेक्षा और अवमानना करते हैं और उन्हें पालतू कुत्ते से भी ज्यादा बदत्तर बना देते हैं।

"पोस्ट बॉक्स 203 नाला सोपारा" 2016 में उस मानसिकता का विरोधी है जो मानव को मानव न समझ कर केवल शारिरिक सुविधा ही समझती है।   


10. मृणाल पांडे :-

"पटरंग पुराण" 1983 में हिमालय के पाददेश में स्थित पहाड़ी अंचल के जीवन चित्र अंकित किये हैं। 11 पीढ़ियों के इतिहास दिखाया है। पटरंग पुर के बसने, विकसित होने को बायस्कोपी रूप में दिखाया है।

                                                  

11.नासिरा शर्मा :-

" सात नदियाँ एक समुन्द्र" 1984 में ईरान की कथा दिखाई है। राजशाह की तानाशाही के खिलाफ जनता की बगावत का चित्रण जिसमे जनता हार जाती है और मुक्ति नही मिल पाती तानाशाही से।

" शाल्मली" 1987 में लेखिका ने एक पढ़ीलिखी महिला अफसर की उन्नति का चित्रण किया है जहाँ उसे आने से ऊपर के अफसरों के द्वारा हीं दिखाया जाता  है और घर मे भी पति द्वारा उसका अनादर ही हकता है।

"ठीकरे की मंगनी" 1989 में जकड़े एक मध्यवर्गीय मुस्लिम परिवार की शिक्षित और संवेदनशील युवती महरूख के संघर्ष की गाथा है।

" अक्षयवट" 2003 में इलाहबाद को केंद्र रखकर लिखा गया है। मानवीय मूल्यों और वर्तमान जीवन की स्थिति को उजागर किया है।

"कुनियाँ जान" 2005 में टेक्नोलॉजी के बढ़ते प्रभाव के कारण क्रमशः निरन्तर छीजते जलस्रोतों की समस्या पर आधारित है।

कागज की नाव" 2014 में बिहार के उन परिवार की कथा है जिसका कोई न कोई सदस्य चंद रुपयों के लिए खाड़ी देशों में नोकरी करने चला जाता है और वतन, परिवार, आदि की जिम्मेदारी को यहाँ छोड़ जाता है।

                                                    

● सहायक ग्रन्थ :- 

1. हिंदी साहित्य का इतिहास- रामचंद्र शुक्ल, वाणी प्रकाशन, 2018 संस्करण।

2. हिंदी साहित्य का इतिहास , विजेंद्र स्नातक, साहित्य अकादमी प्रकाशन,1996 प्रथम संस्करण। 

3. हिंदी साहित्य का उद्भव और विकास, हजारीप्रसाद द्विवेदी।

4. हिंदी साहित्य और संवेदना का विकास, रामस्वरूप चतुर्वेदी, लोकभारती प्रकाशन, 2018 , 25वां संस्करण।

5. हिंदी साहित्य का सरल इतिहास, विश्वनाथ त्रिपाठी, ओरियंटल प्रकाशन, संस्करण 2018

6. हिंदी साहित्य का दूसरा इतिहास, बच्चन सिंह, राधाकृष्ण प्रकाशन, 10वां संस्करण 2018

7. राजभाषा हिंदी वेबसाइट -' उपन्यास की परिभाषा' मनोज कुमार।

8. हिंदी उपन्यास विकिपीडिया।

9. हिंदी का गद्य साहित्य , रामचंद्र तिवारी, 12वां संस्करण, 2018, काशी


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