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Saturday, July 10, 2021

उपन्यास भाग - 8

   

                            (उपन्यास)


हिंदी साहित्य लोचन

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● "हिंदी साहित्य लोचन" पर आज आप हिंदी साहित्येतिहास परम्परा के एक भाग जिसे "आधुनिक काल" के नाम से जाना जाता है। आज हम हिंदी गद्य विधा में उपन्यास, उपन्यासकारों व तथ्यों' पर विशेष रूप से ध्यान देंगे । आशा करते हैं कि यह जानकारी आपकी परीक्षोपयोगी सिद्ध होगी, साथ ही आपके हिंदी साहित्य के ज्ञान में कुछ वृद्धि कराने हेतु भी योगदान देगी। 

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 "हिंदी साहित्य लोचन" पर आप हिंदी के उपन्यास, उनके रचनाकारों व तथ्यों के बारे में व उनकी रचनाओं की विशिष्टताओं पर जानकारी ग्रहण कर सकते हैं। 

 

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उपरोक्त लिंक्स पर जाकर हिंदीसाहित्य के प्रसिद्ध उपन्यासों के चित्रों को देख सकते हैं।


1. मणि मधुकर :- 

मणि मधुकर जी को हिंदी नाटकों में भी गणनीय माना गया है।

" सफेद मेमने" 1971 में राजस्थान के "नांगिया" गाँव को केंद्र में रखकर सन्त्रास, अजनबीपन, जीवन की ऊब को दिखाया है।

"पत्तो की बिरादरी" 1979 में विभाजन और अकाल के बाद दोनों देशों में रोजी रोटी के लिए भटक रहे मानवों व राहत कैम्पों में हो रहे उनके साथ शोषण की कथा है। ऐसा ही कथा का नायक "शुबो" जो पाकिस्तान से आया है उसकी हत्या कर दी गयी है और उसकी कहानी को उसकी पत्नी "जुगनी" आगे बढाती है।


2.मंजूर एहतेशाम :-

" सूखाबरगद" 1986 में देश के बटवारे होने पर प्रगतिशील चेतना दिखाई है। विभाजन होने के बाद भी अब्बू, रसीदा पाकिस्तान नही जाते और पाकिस्तानियो को अलग मानते हैं। साम्प्रदायिक सद्भाव से भरपूर पात्र हैं।

                                                

3. वीरेंद्र जैन -

"शब्दवध" 1983 में, प्रकाशन जगत में व्याप्त अनाचार और प्रतिभाओं का बौद्धिक शोषण का पर्दाफाश किया गया है। लेखक कहते हैं" बंधु यह हिंदी प्रकाशन जगत है यहाँ साहित्यकार पूजे जाते थे। पहले प्रकाशन "सरस्वती" की पूजा करता था अब इसे शुद्ध बनिये चलाते हैं और उन्ही की पूजा होती है जो कमा के दे सकते हैं।

" सबसे बड़ा सिपहिया" 1988 में पुलिस तन्त्र के थानेदार से लेकर हवलदार तक के क्रूर आमानवीय पक्ष को उजागर किया है। 

                                                         

4. मिथिलेश्वर :-

"युद्धस्थल" 1981 में दूधनाथ चौधरी रामशरण बहू डायन करार देकर अपने बेटे की हत्या का कारण मानता है। इसी कारण उसकी हत्या कर दी जाती है।

" प्रेम न बाड़ी उपजै" 1995 में रूपेश और शकुंतला की प्रेमकथा।लेखक के अनुसार पुरुष की अपेक्षा स्त्रियाँ प्रेम को अधिक गहरा समझती हैं।

"यह अंत नहीं" 2000 में खवाड़हीस, पहाड़पुर, रघुनाथपुर को आधार बनाकर बिहार के गाँवो का चित्रण किया है।

                                                      

5. कमलाकांत त्रिपाठी :-

"पाहीघर" 1991 में प्रथम स्वंतत्रता संग्राम 1857 को केंद्र में रखकर लिखी गयी है जिसमें मात्र नवाबो ताल्लुकदारों को ही नहीं देखा है बल्कि किसान, मजदूर, मालगुजार, सामान्य जनता सभी का योगदान के रूप में दिखाया है। कथा की पटभूमि बसौली गाँव के "पाहीघर" है।

इस उपन्यास के बाद लेखक को किसान चेतना का श्रेष्ठ उपन्यासकार मान लिया है।

"यह जो दिल्ली है" 1993 में दिल्ली की पृष्ठभूमि के माध्यम से आज के मूल्यहीन अवसरवादी और सुविधापरस्त पत्रकारिता के जगत का चित्र खींचा है।

 "कथासर्कस" 1995 में इसकी पृष्ठभूमि भी दिल्ली की है जहाँ साहित्य जगत की गुटबाजी, पैंतरेबाजी, जोड़-तोड़ व व्यावसायिकता आदि का कच्चा चिट्ठा पेश किया है। लेखक के अनुसार आज का कथा साहित्य रिंग मास्टर के इशारे पर नाचने वाले कि तरह हो गयी है xxx जो ऊपर से मनोरंजन करते हैं, सुखी रहते हैं परन्तु अंदर से तिक्त, विवश, दर्दनीय हैं।


6. प्रकाश मनु :-

"पापा के जाने के बाद" 1998 में कला जगत में चित्रकार वसन्तदेव के माध्यम से आदर्श विहीन समाज को दिखाया है।

                                                    

7. सुरेंद्र वर्मा :-

"मुझे चाँद चाहिए" 1993 में एक महत्वाकांक्षी कलाकार के संघर्ष की कहानी है। कलाबाजार की प्रतिकूल परिस्थितियों का चित्रण। जिसमें हर्षवर्धन जैसा कलासम्पन्न व्यक्ति अंततः आत्महत्या कर लेता है। लेखक यहाँ आत्महत्या को गलत मानता है।

"दो मुर्दो के लिए गुलदास्ता" 1998 में दिल्ली के शोधछात्र और मथुरा के चौकीदार के बहाने बम्बई की भयानक अपराध और कुत्सित सेक्स की दुनिया का चित्रण किया है। समृद्ध नारियों के अतृप्त सेक्स जीवन की कथा है।


8. भगवान सिंह :

इनका प्रस्तुत उपन्यास रामकथा पर आधारित रचनाओं में विशिष्ट योगदान रखता है। इसमें राम जी के चरित्र को नए अंदाज में बना है। जिसको हम भक्तिकालीन नजरिये से भी देख सकते हैं। जब भक्तों द्वारा अपने आराध्य को अपने अनुसार देखा-समझा जाता था, उनकी भक्ति की जाती थी, उनके आकार-रंग-रूप को ढाला जाता था।

"अपने अपने राम" 1992 में राम कथा की औपन्यासिक कथा कही है। दृष्टि की नवीनतम के बावजूद सत्ता संघर्ष की कहानी बन जाती है, जिसका शायद लेखक अनिमान भी न करता हो।

                                                  

9. प्रदीप सौरभ :-

इनका LGBT कम्युनिटी पर आधारित उपन्यास बहुत ही फेमस हुआ था। 

"मुन्नी मोबाइल" 2009 में बक्सर से आई दिल्ली में एक लड़की की कथा है जिसमें वह महानगरीय जीवन में तेजी से मूल स्वरूप के विपरीत मशीन में तब्दील बन जाती है।

" तीसरी ताली" 2011 हिजड़ो, समलैंगिक, लैसवीयन्स, लौंडेबाज आदि की विकृत यौन सदर्भो को दिखाया है। मुख्यतः हिजड़ो के जीवन को दिखाया है।

10. पंकज बिष्ट :-

"लेकिन दरवाजा" दिल्ली के साहित्यकारों के हरासोन्मुखी सुविधा खोजी जीवन पर आधारित है।


● सहायक ग्रन्थ :- 

1. हिंदी साहित्य का इतिहास- रामचंद्र शुक्ल, वाणी प्रकाशन, 2018 संस्करण।

2. हिंदी साहित्य का इतिहास , विजेंद्र स्नातक, साहित्य अकादमी प्रकाशन,1996 प्रथम संस्करण। 

3. हिंदी साहित्य का उद्भव और विकास, हजारीप्रसाद द्विवेदी।

4. हिंदी साहित्य और संवेदना का विकास, रामस्वरूप चतुर्वेदी, लोकभारती प्रकाशन, 2018 , 25वां संस्करण।

5. हिंदी साहित्य का सरल इतिहास, विश्वनाथ त्रिपाठी, ओरियंटल प्रकाशन, संस्करण 2018

6. हिंदी साहित्य का दूसरा इतिहास, बच्चन सिंह, राधाकृष्ण प्रकाशन, 10वां संस्करण 2018

7. राजभाषा हिंदी वेबसाइट -' उपन्यास की परिभाषा' मनोज कुमार।

8. हिंदी उपन्यास विकिपीडिया।

9. हिंदी का गद्य साहित्य , रामचंद्र तिवारी, 12वां संस्करण, 2018, काशी


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