(आधे-अधूरे)
हिंदी साहित्य लोचन hindisahityalochan sahityahindilochan.blogspot.com
● "हिंदी साहित्य लोचन" पर आज आप हिंदी नेट/जे.आर. एफ परीक्षा में चयनित प्रगतिशील विचारो से लैस और मार्क्सवादी सिद्धान्तों व विचारों से सहमत कथाकार "यशपाल" के सर्वप्रसिद्ध- सर्वचर्चित उपन्यास 'झुठासच' के बारे में कुछ विशेष तथ्य जानने की कोशिश करेंगे। आशा करते हैं कि यह जानकारी आपकी परीक्षोपयोगी सिद्ध होगी, साथ ही आपके हिंदी साहित्य के ज्ञान में कुछ वृद्धि कराने हेतु भी योगदान देगी।
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● प्रमुख तथ्य व अन्य बातें :-
निर्देशक का वक्तव्य:-
" यह आलेख एक स्तर पर स्त्री और पुरूष के बीच लगाव और तनाव का दस्तावेज़ है".....।
मैं प्रदर्शन में सादगी का कायल हूँ। इसलिए प्रकाश व्यवस्था में किसी तरह की लटके नही चाहता। नाटक के लिए उपयुक्त सादगी आलोक-पद्धति है। प्रारंभ में कुछेक चीजे आलोकित करती थी फिर लाइट हाउस में घुल-मिल जाती थी। (निर्देशक)
● पात्र योजना :-
1. महेन्द्रनाथ:- पति
2. सावित्री:- पत्नी
3. अशोक :- लड़का
4. बिन्नी: - बड़ी लड़की
5. किन्नी :- छोटी लड़की
6. जुनेजा, सिंघानिया और जगमोहन :- जिनसे सावित्री जीवनसाथी के सपने देख रही थी।
7. सुषमा :- जुनेजा की बेटी
8. मनोज :- बिन्नी का पति
9. शोकी
10. शिवजीत - इस से भी सावित्री का सम्बंध रहा था।
● यह नाटक 4 अंको में लिखा है। जो निम्नांकित हैं :-
1. निर्देशक का वक्तव्य
2. पात्र योजना
3. पूर्वाध
4. उत्तरार्ध
(मूल कथा के कुछ अंश )
•" महेन्द्रनाथ" :- जब जब किसी नए आदमी का यहाँ आने शुरू होता है, मैं शुक्र ही मानता हूँ"....।
• "जिससे उसके मन को कड़ी से कड़ी चोट पहुचा सकू। मेरे लम्बे बालो को पसंद करता है, सोचती हूँ इन्हें कटवा दूँ"..।(बिन्नी के मुताबिक मनोज में वह गुण नही)
• "अधिकार, रुतबा और इज्जत - यह सब बाहर के लोगो से मिल सकता है इस घर में। इस घर का जो आजतक बना है वह सब बाहर के लोगो से"....। (महेन्द्रनाथ- सावित्री से)
• "उसकी बड़ी चीज की वजह से । किसी की तनख्वाह, किसी का इंटलेक्चुअलपन और तो किसी की पदवी। किसी आदमी को न बुला कर उसकी औकात को बुलाया जाता है".।(अशोक - सावित्री से)
• " सावित्री महेंद्र की नाक में नकेल डाल कर उसे चला रही है।सावित्री ने बेचारे की रीढ़ ही तोड़ दी। अब वह जैसे किसी हाड़ मांस का पुतला हो"....। (दोस्तो का कथन)
● आधार ग्रन्थ
1. आधे-अधूरे, मोहन राकेश,
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